व्यवसायीकरण के दौर में फिल्मों और छोटे पर्दे पर कला कमजोर हुई: राजा बुंदेला

भोपाल, 13 अक्टूबर । फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में व्यावसायिकता बढ़ने के कारण कला का प्रभाव कुछ कमजोर हुआ है। अभिनय में भावनाओं का समावेश होना जरूरी है। कला को संस्कारों से जोड़कर काम किया जाए तो सफलता की राह आसान हो जाती है। यह बात प्रख्यात अभिनेता राजा बुंदेला ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित सिनेमा संवाद कार्यक्रम में कही।

विश्वविद्यालय के सिनेमा तथा विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में राजा बुंदेला ने विद्यार्थियों के साथ सिनेमा और अभिनय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानना जरूरी है। इसके बाद संबंधित क्षेत्र की जरूरतों के मुताबिक खुद को तैयार करना और लगातार मेहनत करना सफलता के लिए आवश्यक है।

अभिनेता ने कहा कि पहले सिनेमा जैसे रचनात्मक क्षेत्र की बुनियादी शिक्षा देने वाले अच्छे संस्थान दूर-दराज के क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं थे। अब कई स्थानों पर ऐसे संस्थान मौजूद हैं, जहां युवा प्रारंभिक प्रशिक्षण लेकर फिल्म उद्योग में काम करने के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं।

राजा बुंदेला ने कहा कि सिनेमा के क्षेत्र में इस समय अवसरों की कमी नहीं है। छोटी-छोटी भूमिकाओं में भी कलाकार अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ रहे हैं। किसी फिल्म में किरदार भले ही सामान्य हो, लेकिन अभिनेता अपनी अदाकारी से उसे प्रभावशाली बना सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन और अभिनय के बीच समानता समझाते हुए कहा कि व्यक्ति को पहले अपनी वास्तविकता पहचाननी चाहिए। जब अपने उद्देश्य स्पष्ट होते हैं, तभी आगे बढ़ने की दिशा तय होती है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को सिनेमा के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए उपयोगी सुझाव भी दिए।

इस अवसर पर राजा बुंदेला ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी से मुलाकात की। उन्होंने कुलगुरु और विद्यार्थियों को खजुराहो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शामिल होने का आमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि महोत्सव के दौरान सिनेमा और उससे जुड़े विभिन्न विषयों पर कई मास्टर क्लास भी आयोजित की जाएंगी।