कपूरथला में धान खरीद पर ठप, आढ़तियों की हड़ताल से फसल तुलाई- सफाई बंद!

पंजाब में आज से प्रारंभ हुई सरकारी धान खरीद के पहले दिन कपूरथला जिले में कोई भी धान की खरीदारी नहीं हो सकी। मंडी में आढ़ती एसोसिएशन के सदस्यों ने अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल का आह्वान किया है, जिसके कारण कोई भी किसान अपनी फसल लेकर मंडी नहीं पहुंचा। आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान विपन कुमार ने बताया कि कपूरथला यूनिट ने अनाज मंडी में धरना प्रदर्शन करते हुए नाराजगी व्यक्त की और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।

संगठन के नेताओं ने अपनी मांगों की सूची प्रस्तुत की है, जिसमें प्रमुख मांगों में आढ़ती फीस का संशोधन शामिल है। बताया गया कि यह फीस साल 2019 से 46 रुपए प्रति क्विंटल पर स्थिर है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, ईपीएफ से संबंधित लगभग 50 करोड़ रुपए की राशि की तत्काल रिलीज करने, लोडिंग के लिए श्रमिकों के भत्ते का निर्धारण न होने, और निजी कंपनियों के गोदामों में रखे अनाज पर आढ़त न मिलने जैसी समस्याएं भी शामिल हैं।

आढ़ती सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं की जाएंगी, तब तक मंडी में हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हड़ताल करना उनके लिए एक मजबूरी है, और इस संघर्ष का सीधा प्रभाव पूरे खरीद प्रक्रिया पर पड़ेगा। कपूरथला की मंडियों में धान की खरीद के लिए यह स्थिति अत्यंत गंभीर बन गई है, जो किसानों और आढ़तियों दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो रही है।

इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट होता है कि जब तक सरकार आढ़तियों के मुद्दों के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाएगी, तब तक स्थिति में सुधार होने की संभावना कम है। किसानों के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि धान की खरीद की प्रक्रिया में देरी से उनके हित प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सभी दलों को बैठकर इस मुद्दे का समाधान निकालना होगा, ताकि घटती आमदनी और अनिश्चितता से किसानों को बचाया जा सके।

ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकारी खरीद की प्रक्रिया में न केवल आढ़तियों की भलाई है, बल्कि इससे कृषि क्षेत्र की समग्र अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। यदि इसी तरह की हड़तालें जारी रहीं, तो यह न केवल प्रदेश के किसानों के लिए बल्कि समस्त कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती उत्पन्न कर सकती हैं। आशा है कि सरकार इस समीकरण को समझते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी, ताकि सभी संबंधित पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके।