गरीबों की दाल पर मार, व्यापारी भी परेशान

गरीबों की दाल पर मार, व्यापारी भी परेशान

-दोहरे टैक्स के खिलाफ दाल मिलर्स आंदोलित, उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी से मिला आश्वासन

जयपुर, 8 अक्टूबर (हि.स.)। बाजार में इन दिनों मसालों, खाद्य तेल और अन्य खाद्य पदार्थों के साथ गरीबों की दाल पर भी महंगाई का तड़का लग गया। महंगाई की इस मार से आमजन तो परेशान हैं ही व्यवसायी भी परेशान हैं। टैक्स की दोहरी मार से पीड़ित दाल मिलर्स तो पिछले तीन माह से आंदोलन रत हैं। अपनी मांगों को लेकर दाल मिल व्यवसायी राज्य के मुख्य मंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा सहित प्रमुख ब्यूरोक्रेट के यहां लगातार गुहार लगा रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार को उप मुख्यमंत्री एवम् वित्त मंत्री दीया कुमारी से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा। दीया कुमारी ने हालांकि व्यवसायियों को आश्वस्त किया हैं कि मंत्रिमंडल की बैठक से पूर्व उनके पक्ष को उच्च स्तर पर सुना जा सकारात्मक समाधान निकाला जाएगा। जयपुर दाल मिलर्स एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पवन अग्रवाल ने दाल मिल व्यापारियों की वास्तविक समस्या उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी के समक्ष रखी और बताया कि टैक्स की दोहरी मार कम होने से सरकार की कर आय घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी। दाल मिलों के दूसरे राज्यों में पलायन का संकट भी टलेगा और दाल मिलों से हजारों लोगों को जो रोजगार मिला हुआ है,वह भी यथावत रहेगा।

व्यवसायियों ने बताया कि राजस्थान में दलहन पर 1.60 प्रतिशत मण्डी शुल्क और 0.50 प्रतिशत कृषक कल्याण नामक सेस वसूला जा रहा है। व्यापारी कृषक कल्याण फीस को पूरी तरह समाप्त करने तथा मंडी टैक्स भी एक प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। व्यापारी मंडी के बाहर दलहन की खरीद और दूसरे प्रदेशों से आनी वाली दलहन पर फिर से मंडी टैक्स की वसूली के खिलाफ हैं। उनका तर्क हैं कि दूसरे प्रदेशों में मंडी टैक्स देकर दलहन खरीद कर लाते हैं तो यहां फिर से टैक्स वसूली मोदी सरकार की ” वन नेशन, वन टैक्स” नीति के भी खिलाफ हैं। करोना के समय लगाया कृषक कल्याण कर यथावत थोपें रखने का कोई औचित्य नहीं। दूसरे राज्यों से दलहन प्रोसोसिंग के लिए आती है, फिर बाहर चली जाती है, ऐसे में टैक्स की मार बेवजह ही व्यापारियों पर लादी जा रही हैं। राजस्थान की मंडी कर नीति के चलते दूसरे प्रदेशों के दाल मिलर्स सस्ते में माल बेच रहे हैं और प्रदेश के व्यापारी अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

उन्हाेंने बताया कि प्रदेश में निवेश के लिए सरकार दिसंबर में राइजिंग राजस्थान का आयोजन कर रही हैं। व्यवसायी अपनी मांगों को इस आयोजन से भी जोड़ रहे है। व्यवसायियों का कहना कि एक तरफ सरकार देश- विदेश से निवेशकों को राजस्थान में उद्योग लगाने के लिए आमंत्रित कर रही है, जबकि दूसरी तरफ टैक्स की दोहरी मार से प्रदेश की दाल मिलों पर ताले लगने की नौबत आ गई हैं।

बिसाऊ के दाल मिल संचालक रामप्रकाश बीरमीवाला ने बताया कि राजस्थान राज्य के बाहर से आने वाले कच्चे माल (दलहन) को मंडी टैक्स से मुक्त किया जाए, क्योंकि उस पर पहले से ही टैक्स लगा हुआ रहता है। कोरोना काल में लगाया गया कृषि कल्याण शेष खत्म किया जाए। मंडी टैक्स दर 1.60 प्रतिशत बहुत ज्यादा है इसे कम किया जाए।