फाजिल्का से आम आदमी पार्टी के ट्रेड विंग के स्टेट सेक्रेटरी और गो संरक्षण आयोग के सदस्य अरुण वधवा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक लाइव सत्र के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने बताया कि फाजिल्का नगर में हर गली और चौराहे पर अवैध सट्टे का कारोबार जोरों पर है। वधवा ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इस अवैध गतिविधि को किसके इशारों पर चलाया जा रहा है। क्या इसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है या फिर प्रशासन के कुछ अधिकारी ही सट्टे के इन सरगनाओं के साथ हैं? उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच करें और सट्टा ठिकानों को बंद करने के कदम उठाएं।
फाजिल्का में सट्टे के मामलों की बढ़ती शिकायतों के संदर्भ में वधवा ने कहा कि पिछले कुछ समय से उन्हें इस तरह की कई शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। उनके अनुसार, शहर के हर मोहल्ले, गली और चौराहे पर लोग सट्टा खेल रहे हैं। यह न केवल आम जनता के पैसे को बर्बाद कर रहा है, बल्कि हमारे युवाओं को भी नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इस सट्टे के धंधे को तुरंत समाप्त किया जाए ताकि युवा पीढ़ी इसके नकारात्मक प्रभाव से बच सके।
इस बीच, फाजिल्का पुलिस ने भी इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। डीएसपी तरसेम मसीह ने कहा है कि पुलिस ने पहले भी सट्टा और जुए के मामलों में कार्रवाई की है और नियमित रूप से एफआईआर दर्ज की गई हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस की नीति इन मामलों में अत्यंत सख्त है। उनका कहना था कि जैसे ही उन्हें किसी भी प्रकार की शिकायत मिलती है, पुलिस तुरंत कार्रवाई करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी व्यक्ति को इस मामले में बख्शने का इरादा नहीं रखती।
अरुण वधवा ने प्रशासन से यह भी अनुरोध किया कि वे सट्टा खेल रहे लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करें और उन्हें दंडित करें। उनका मानना है कि यह अवैध गतिविधि केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुँचा रही, बल्कि समाज पर भी नकारात्मक असर डाल रही है। ऐसे में, वधवा द्वारा उठाए गए प्रश्न यह स्पष्ट करते हैं कि सट्टे का यह खतरनाक खेल केवल एक व्यक्ति या समूह का नहीं, बल्कि समाज के समग्र स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
इस दौरान पुलिस और प्रशासन को चाहिए कि वे इस मसले पर गंभीरता से विचार करें। केवल बयान देने के बजाय, उन्हें वास्तविक कार्रवाई दिखानी होगी ताकि फाजिल्का में सट्टे का यह अवैध धंधा समाप्त हो सके और युवा पीढ़ी को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाया जा सके। यदि स्थानीय प्रशासन ठोस कदम उठाता है, तो संभवतः शहर को इस समस्या से निजात मिल सकेगी।