कपूरथला में 10 मजदूरों की रिहाई: मानव तस्करी का गढ़, बिहार सीएम के निर्देश पर छापेमारी!

कपूरथला जिले में सिधवां दोनां गांव के निकट स्थित एक आलू फार्म से दस बंधुआ मजदूरों को ठेकेदार बिगन राय के चंगुल से मुक्त किया गया है। यह कार्रवाई स्थानिय प्रशासन, जिसमें उप-जनपद अधिकारी (एसडीएम) और सदर थाना के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) शामिल हैं, के मार्गदर्शन में की गई। ये मजदूर जिनमें 3-4 नाबालिग भी हैं, दो महीने पहले बिहार के सीतामढ़ी जिले से सोने के लिए काम करने आए थे, लेकिन ठेकेदार द्वारा उन्हें बंधक बना लिया गया और लगातार मेहनत लेने के बावजूद उन्हें कोई भुगतान नहीं किया गया।

पुलिस की छापेमारी की सूचना मिलते ही ठेकेदार फरार हो गया। जानकारी के अनुसार, ये मजदूर सीतामढ़ी के सुरसंड स्थित मेघपुर गांव के निवासी हैं और उन्हें 12-13 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया गया। मजदूरों की लगातार कठिनाइयों के चलते दो युवक वहां से भागकर अपने गांव लौटने में सफल हो गए और प्रशासन को अपनी दास्तान सुनाई। अब, पुलिस ने उनके बयान के आधार पर आलू फार्म के मालिकों से भी पूछताछ शुरू की है।

डीएसपी दीपकरण सिंह और कार्यकारी एसडीएम कपिल जिंदल ने मजदूरों से बात की और उन्हें उनके गांव वापस भेजने का आश्वासन दिया है। इस परेशान करने वाली घटना में 6 बिहार के और 4 नेपाल के मजदूर शामिल हैं। नेपाल के मजदूरों में से चार सरलाई जिले के रहने वाले हैं और पिछले डेढ़ साल से इस ठेकेदार के साथ काम कर रहे थे। बंधक मजदूरों ने बताया कि उन्हें उच्च वेतन का वादा कर आलू फार्म लाया गया था, लेकिन उन्हें केवल मारपीट और दुराचार का सामना करना पड़ा।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री ने पंजाब के मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क साधा और मामले की गंभीरता से निपटने का आग्रह किया। गुरुवार को जिला प्रशासन ने आलू फार्म हाउस में छापामारी की, जिसमें मजदूरों की भीड़ से बातचीत की गई। मजदूरों ने खुलासा किया कि ठेकेदार बिगन राय ने उन्हें मेहनत का वादा किया था, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही थी, जिसमें मारपीट आम बात बन गई थी।

आलू फार्म हाउस के मालिक तेजा सिंह और जसबीर सिंह ने इस स्थिति से अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्हें ठेकेदार द्वारा मजदूरों के साथ किए जा रहे दुर्व्यवहार की जानकारी नहीं थी। प्रशासन इस मामले की गहन जांच कर रहा है ताकि मजदूरों के साथ हुए दुव्र्यवहार की सच्चाई स्पष्ट हो सके और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जा सके। यह घटना श्रमिक अधिकारों और मानवाधिकारों की गंभीर उल्लंघना को उजागर करती है, जिससे समाज में संवेदनशीलता को बढ़ाने की आवश्यकता है।