गिद्दड़बाहा में कांग्रेस कलह: बिट्टू-वड़िंग की तीखी तकरार, आरोप-प्रत्यारोप जारी!

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष और लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की पत्नी अमृता वड़िंग गिद्दड़बाहा में हुए उपचुनाव में हार गई हैं। इस नतीजे के बाद सांसद राजा वड़िंग ने केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू पर तीखा प्रहार किया। मीडिया से बातचीत के दौरान वड़िंग ने बिट्टू को मंदबुद्धि बच्चा कहकर उनकी सोच और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिट्टू को यह समझना चाहिए कि क्या उन्होंने आम आदमी पार्टी को विधायक बनवाकर कोई राजनीतिक बदला लिया है या सिर्फ 12,000 वोट डालकर भाजपा को हरवाने की कोशिश की है।

राजा वड़िंग ने आगे आरोप लगाया कि बिट्टू द्वारा किए गए बयान किसानों के हित के खिलाफ हैं। उन्होंने बताया कि बिट्टू को इस पद पर आए 12 दिन हो चुके हैं, जबकि मनप्रीत बादल को महज 12,000 वोट ही मिले हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि ये वोट किसी और के बजाय बिट्टू, मनप्रीत बादल और भाजपा के तरफ गए हैं। वड़िंग ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान और रवनीत के बीच कोई मौलिक अंतर नहीं है। बिट्टू को मनप्रीत बादल के साथ मिलकर हार का विश्लेषण करना चाहिए था, लेकिन वह अपने कार्यों में असफल रहे हैं।

राजा वड़िंग ने कहा कि उन्हें पहले ही पता था कि बिट्टू मनप्रीत बादल को हराने के लिए इस चुनाव में कार्यरत थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिट्टू ने अपनी बयानबाजी से मनप्रीत बादल की छवि को और खराब किया है। वड़िंग ने बिट्टू के बारे में कहा कि गिद्दड़बाहा के लोग उनके प्रति अधिक जवाबदेह हैं, और बिट्टू कभी भी उन्हें भावनात्मक रूप से परेशान नहीं कर सकते हैं।

अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने अमृता की हार पर रवनीत सिंह बिट्टू की प्रतिक्रियाओं की भी निंदा की। हाल ही में, बिट्टू ने कहा था कि राजा वड़िंग और सुखजिंदर सिंह रंधावा को कांग्रेस की हार के लिए इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि दोनों नेताओं ने अपने गढ़ को बचाने में असफलता दिखाई है। बिट्टू ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य गिद्दड़बाहा में राजा की रानी को हराना था और इस हार में पूर्व मुख्यमंत्री चन्नी और बाजवा का भी योगदान था।

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि गिद्दड़बाहा के उपचुनाव ने न केवल सत्तारूढ़ दलों के बीच मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह की राजनीति चल रही है। यह चुनावी नतीजा भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों पर गहरा असर डाल सकता है। वड़िंग और बिट्टू के बीच का यह वाद- विवाद यह स्पष्ट करता है कि पंजाब की राजनीति में अभी भी कई प्रश्न और चिंताएं बाकी हैं।