अबोहर में दिव्यांग की हुंकार: पेंशन बढ़ी नहीं तो होगा जोरदार आंदोलन!

पंजाब के फाजिल्का जिले में अबोहर शहर में दिव्यांग समुदाय की आवाज अब तेजी से उठने लगी है। यहां के गांव घल्लू के निवासी मंगल सिंह नामक एक दिव्यांग व्यक्ति ने जिला उपायुक्त को एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा है, जिसमें दिव्यांगों के अधिकारों और आवश्यक सुविधाओं को लेकर कई प्रमुख मांगें प्रस्तुत की गई हैं। इस ज्ञापन में, उन्होंने विशेष रूप से दिव्यांगों, विधवाओं, बुजुर्गों और आश्रित बच्चों की पेंशन से संबंधित मामलों पर जोर दिया है।

मंगल सिंह की सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि बुजुर्गों की पेंशन की पात्रता आयु को 65 साल से घटाकर 60 साल किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने अन्य पेंशनधारियों की पेंशन राशि बढ़ाने का अनुरोध किया है। उनका सुझाव है कि दिव्यांग, विधवा, बुजुर्ग और आश्रित बच्चों की मासिक पेंशन को महंगाई के अनुसार बढ़ाकर न्यूनतम 5 हजार रुपये प्रति माह किया जाए। इस मांग में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की आर्थिक स्थिति को सुधारने का प्रयास किया गया है, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आ सके।

ज्ञापन में स्वास्थ्य सेवाओं का भी उल्लेख किया गया है। मंगल सिंह ने मांग की है कि दिव्यांग, विधवा और बुजुर्ग लोगों का 5 लाख रुपये तक का इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में निःशुल्क किया जाए। इससे इन लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी, जो उनकी जीवन स्थिति को सुदृढ़ बनाते हुए उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कृषि मजदूरों की दैनिक मजदूरी को 700 रुपये करने का अनुरोध किया गया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

मंगल सिंह ने रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए दिव्यांग और विधवाओं को कम ब्याज पर एक लाख रुपये तक का लोन देने की भी मांग की है। इससे न केवल उनके स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा। इसके अलावा, उन्होंने मनरेगा और अन्य सरकारी कार्यों में लगे मजदूरों की दैनिक मजदूरी को 700 रुपये करने का आग्रह भी किया।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि एक महीने के भीतर उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो वे डीसी कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे। मंगल सिंह की यह पहल विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए एक मिसाल पेश करती है और समाज में दिव्यांगों के अधिकारों को मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।