लुधियाना: गर्लफ्रेंड से झगड़े के बाद नाबालिग लड़के की इंस्टाग्राम पर सुसाइड!

लुधियाना में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां 17 वर्षीय किशोर अर्पण शर्मा ने अपनी प्रेमिका के साथ विवाद के चलते आत्महत्या कर ली। यह घटना उस समय हुई जब दोनों में तीखी बहस चल रही थी। अर्पण के परिवार के सदस्य जब उसे चाय देने के लिए उसके कमरे गए, तो उन्होंने देखा कि दरवाजा अंदर से बंद है और जब उन्होंने दरवाजा तोड़ा, तो पाया कि अर्पण फंदे पर लटका हुआ है। उसकी मोबाइल फोन जमीन पर गिरा हुआ था, जिससे परिवार में हड़कंप मच गया। यह घटना किशोर के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुई और परिजनों ने तुरंत पुलिस को इस मामले की सूचना दी।

अर्पण के परिवार की महिला सदस्य मोनिका ने बताया कि अर्पण पिछले आठ महीनों से एक स्थानीय लड़की के साथ रिश्ते में था। उनके बीच की बातचीत अक्सर विवादों में बदल जाती थी। उन्होंने बताया कि दोनों ने तय किया था कि वे 6 फरवरी को एक साथ आत्महत्या करने जाएंगे। अर्पण की मां, रितु ने कहा कि यह बात उनके लिए बेहद चौंकाने वाली थी, क्योंकि उन्हें यह नहीं पता था कि अर्पण की उस लड़की के साथ क्या समस्याएं चल रही थीं। दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे, और दोनों परिवारों के बीच शादी की बात भी चल रही थी।

इस संबंध में और जानकारी देते हुए, रितु ने कहा कि जब भी वह लड़की उनके घर आती थी, जैसे उनके बीच का रिश्ता सामान्य था। हालांकि, अब उनकी बेटी की परेशानियों की वजह से कोई भी स्पष्ट कारण पता नहीं चल रहा है। पुलिस ने अर्पण के मोबाइल को जब्त कर लिया है और उस पर की गई चैटिंग को जांचने का दावा किया है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने बताया कि कुछ चैट डिलीट हो गई हैं, जिन्हें पुलिस रिकवर करने की कोशिश कर रही है।

इस बेहद संवेदनशील मामले की जांच कर रहे थाना बस्ती जोधेवाल के SHO जसबीर सिंह ने कहा कि मामला अभी भी संदिग्ध है, क्योंकि दोनों ही किशोर नाबालिग हैं। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और उन्हें कुछ महत्वपूर्ण संदेश मिल सकते हैं जो डिलीट हो गए हैं, जिसे वे जल्द से जल्द रिकवर करेंगे। परिवार के सदस्य इस बात की प्रतीक्षा कर रहे हैं कि अर्पण की मौत के पीछे जो कारण हैं, उन्हें जल्द से जल्द पता चल सके।

इस घटना ने एक बार फिर से युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या और संबंधों में बढ़ते तनाव के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता को उजागर किया है। परिवार और समाज को इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए संवाद और सहानुभूति के माध्यम से एक दूसरे का सहारा बनना बेहद जरूरी है। इस प्रकार की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएँ हमारे समाज को सोचने पर मजबूर करती हैं कि हमें अपने बच्चों की भावनाओं और समस्याओं को समझने और उनकी मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।