काव्य गोष्ठी में बही राष्ट्र प्रेम की अविरल धारा

काव्य गोष्ठी में बही राष्ट्र प्रेम की अविरल धारा

जोधपुर, 19 मई (हि.स.)। संस्था काव्य-कलश की गोष्ठी पावटा सी रोड स्थित कार्यालय में संपन्न हुई जिसमें हिंदी, उर्दू और राजस्थानी भाषा के 15 शीर्ष कलमवीरों ने तीन घंटे के अनमोल पलों को राष्ट्र-प्रेम की अविरल धारा में प्रवाहित कर अक्षुण्ण एवं अविस्मरणीय बना दिया।

गोष्ठी का ओजपूर्ण आगाज प्रदीप मिश्रा ने घर घर तिरंगा है से किया। डॉ. छगनराज राव ने गीत गौरव गाथा के आज तुमको सिखलाता हूं, डॉ. दीपा परिहार ने अठै मां तो सागैसी खड़ीसी दिखै, सुनाकर मां को आंखों के सामने जीवंत लाकर खड़ा कर दिया। दीपिका रूहानी ने भी मां कैसी होती है सुनाकर सबको भाव-विह्वल कर दिया। गजलकार खुरशीद खैराड़ी ने आग उगलती ताजा गजल पूछकर धर्म मार दी गोली प्रस्तुत की।

गजलकार अशफाक अहमद फौजदार ने तूफां को तो पूरी छूट करे वो कुछ भी, अदना सी हवा पर निगाहबानी बहुत है उम्दा गजल पेश की। गर्मी में कहां अब सडक़ें सूनी लगती, आबादी दिन दूनी रात चौगुनी लगती कविता सुनाकर हंसराज ने असलियत भरे व्यंग्य का छमका लगा दिया डिंगल भाषा की मिठास दिलीप राव श्रीमाली दलपत की रचना जल तो जीवन रेख कहिजे के कवित्त में महसूसी गई। जाने-माने शायर असरार आहिल ने अपने कलाम देखकर डूबता सूरज ये खय़ाल आता है सुनाकर सबकी आंखों को भिगो दिया।

एडवोकेट एनडी निंबावत ने मधुर गीत और खूबसूरत कव्वाली पेशकर मन मोह लिया। उभरते कवि उमेश दाधीच ने मैं तो एक मुसाफिऱ ठहरा, तू मेरी बात ना ही कर, महती कविता के माध्यम से अपनी संभावनाए जतला दी। ऊर्जावान रचनाधर्मी राजेश मोहता ने पत्थरों के महल में सो सोकर लोग मुर्दा हो गए सुनाकर श्रोताओं की चेतना को झिंझोड़ दिया। छोटी बहर की कविताओं के लिए प्रसिद्ध नवीन पंछी ने कहा करती मां, फुर्सत मिले तब मिलने आना, आज फुर्सत है, मगर मां नहीं है सुनाकर आंखों को नम कर दिया। वरिष्ठ कवि श्याम गुप्ता शान्त ने अपनी आधी सदी पुरानी व्यंग्य कविता मैं चमचा हूं अफसर का सुनाकर सदन में हास्य-रस ऊंड़ेल दिया।

अध्यक्ष मनोहर सिंह राठौड़ ने अपनी राजस्थानी व्यंग्य रचना म्हारो चेहरो कठै गयो का वाचन कर कार्यक्रम का समापन किया। काव्य-गोष्ठी का संचालन और आगंतुक रचनाकारों का धन्यवाद संस्था के उपाध्यक्ष अशफ़ाक अहमद फौजदार ने किया।