लखनऊ की एडीजे अदालत ने नरभक्षी राम निरंजन उर्फ राजा कोलंदर और उसके साले वक्षराज को नरसंहार के मामलों में उम्रकैद की सजा सुनाई है। दोनों आरोपियों को वर्ष 2000 में रायबरेली के 22 वर्षीय मनोज सिंह और उनके ड्राइवर रवि श्रीवास्तव का अपहरण कर हत्या करने का दोषी पाया गया है। जानकारी के अनुसार, राजा कोलंदर ने अपने अपराधों का खुलासा करते हुए बताया है कि वह 14 से ज्यादा हत्या कर चुका है। हत्याओं के बाद वह शवों के अंगों को काटकर खा जाता था और खोपड़ी से मस्तिष्क निकालकर सूप बनाकर पीता था। उसकी बर्बरता ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी थी। दैनिक भास्कर की टीम ने प्रयागराज से 40 किलोमीटर दूर नैनी में राजा कोलंदर के आवास का दौरा किया। वहां पहुंचने पर पता चला कि जिस फार्म हाउस में नरमुंड मिले थे, वो अब बंजर नेपित हो चुका है।
साल 2000 से पहले राजा कोलंदर के आवास के आसपास हरियाली थी, लेकिन अब वहां किसी प्रकार की खेती नहीं होती। पहले इस भूमि पर बंजर जमीन नहीं थी, बल्कि पुलिस ने अंतिम बार यहाँ खुदाई की थी, जिसमें नरमुंड मिले थे। अब राजा कोलंदर का घर खंडहर में तब्दील हो चुका है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उसके परिवार के सदस्य पास के मकान में रहते हैं। राजा कोलंदर के पोते शशांक ने पेश किए गए कुछ सवालों के जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि उनके नाना निर्दोष हैं और उनके खिलाफ आरोप गलत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाना के खिलाफ जो बातें कही जाती हैं, वे पूरी तरह से झूठी हैं।
राजा कोलंदर का नाम तब सामने आया जब 14 दिसंबर 2000 को एक पत्रकार धीरेंद्र सिंह की हत्या की गई। इस हत्या की जांच में कई महत्वपूर्ण सबूत सामने आए, जिसके चलते राजा कोलंदर की गिरफ्तारी हुई। उसने पत्रकार धीरेंद्र की हत्या के साथ-साथ अपने कई और अपराधों की भी बात कबूल की। उसकी डायरी में 14 हत्याओं का जिक्र है, जिसने पुलिस को उसकी क्रूरता के बारे में गंभीरता से सोचने पर मजबूर कर दिया। अदालत ने राजा कोलंदर को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए इसे “रेयरेस्ट ऑफ दी रेयर” मामला माना।
राजा कोलंदर ने न केवल मनोज सिंह की हत्या की, बल्कि अपने कर्मों के कारण एक पत्रकार की भी जान ले ली। ज्ञात हुआ है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर अपने फार्म हाउस में कई हत्याओं को अंजाम देता था और शवों को ठिकाने लगाने के लिए अपने फार्म हाउस का उपयोग करता था। उसके खिसकते हुए दबंगई के कारण इलाके में लोग उस से भयभीत थे। मामले की गहराई में जाकर जब पुलिस ने उसे पकड़ा, तो एक भयानक सच सामने आया। स्थानीय समाज से लेकर समाज विज्ञान के जानकार भी उसकी दरिंदगी के कृत्यों को देखकर हैरान रह गए।
इस केस की सुनवाई में कई साल लगे और अंतत: एडीजे कोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के बाद उसे सजा सुनाई। इस केस ने न केवल उत्तर प्रदेश में बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया। इसके बाद एक वेब सीरीज भी बनाई गई, जिसका नाम रखा गया “इंडियन प्रिडेटर: द डायरी ऑफ अ सीरियल किलर”, जो इस भयावह कहानी को दर्शाती है। इस मामले ने हमें यह सिखाया कि कभी-कभी समाज में छिपे हुए भेड़िये हमारे आस-पास होते हैं, और हमें उनकी पहचान करने में सावधान रहना चाहिए।