का समय दिया था, जिसकी समय सीमा मंगलवार शाम समाप्त हो गई।
इसी को लेकर आरडी सिटी सेंटर के दुकानदार
दरी बिछाकर मुख्य गेट पर धरने बैठ गए। दुकानदारों का कहना है कि वह दुकानें खाली नहीं
करेंगे। बिल्डिंग में रैंप की कमी थी जिसे पूरा कर दिया गया है। बता दें कि इस मॉल के सील होने से
करीब 100 दुकानें प्रभावित होंगी, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े 300
से ज्यादा परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
मामले के अनुसार अनुराग मल्होत्रा द्वारा पंजाब एंड
हरियाणा हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस मॉल की खामियां परत-दर-परत खुलीं। आरोप
है कि बेसमेंट में जहां नियमानुसार पार्किंग होनी चाहिए थी, वहां अवैध रूप से दुकानें
बना दी गईं। आरोप है कि नक्शा धोखाधड़ी से पास कराया गया और आपातकालीन निकास (एमरजेंसी
गेट) तक की व्यवस्था नहीं की गई। डेवलपर्स पर बगल वाली गली को अवैध रूप से अपनी संपत्ति
में शामिल करने का भी आरोप है।
इससे पहले बुधवार को होने वाली कार्रवाई
की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने पुलिस बल की मांग की थी। अधिकारियों का कहना था
कि वे केवल हाईकोर्ट की डबल बेंच (चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल)
के आदेशों की पालना कर रहे हैं। मॉल के मालिकों (राधेगोपाल डेवलपर्स) पर नियमों के
घोर उल्लंघन के आरोप सिद्ध होने के बाद अब राहत की कोई गुंजाइश नहीं बची है।