लखनऊ, 25 मई । उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘अमृत सरोवर योजना’ के तहत उत्तर प्रदेश 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार पूरा हो चुका है। ग्राम्य विकास विभाग के मुताबिक देश में मौजूद सभी अमृत सरोवरों में से लगभग 30 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में निर्मित किए गए हैं। साथ ही इस योजना के तहत स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित हो रहा है।
अब तक पूरे प्रदेश में 19,978 सरोवरों का निर्माण
सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश में गोरखपुर सबसे आगे है। यहां 735 सरोवरों का निर्माण हो चुका है। वहीं महाराजगंज में 601 और प्रयागराज में 525 सरोवर निर्माण के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। अब तक 19,978 सरोवरों का निर्माण पूरे प्रदेश में हो चुका है।
कई स्तर पर हो रहा फायदा
उत्तर प्रदेश अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार करने में देश में पहले स्थान हासिल कर चुका है। यह पहल केवल जल स्रोतों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और कृषि आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में भी सहायक है।
अमृत सरोवरों का निर्माण वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दे रहा है, जिससे किसानों को सिंचाई में सहायता मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में जल की उपलब्धता में सुधार हो रहा है। साथ ही यह अभियान गांवों में हरियाली, स्वच्छता और सतत विकास को एक नई दिशा दे रहा है। जल संरक्षण के ये प्रयास ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए एक मजबूत आधार बन रहे हैं।
पर्यावरण को स्वच्छ बना रहे अमृत सरोवर
राज्य सरकार के प्रवक्ता के अनुसार इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इन जल निकायों को सिर्फ पानी इकट्ठा करने का साधन नहीं बनाया गया। प्रत्येक अमृत सरोवर को न्यूनतम 01 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार क्यूबिक मीटर है। इसके चारों तरफ ग्रामीणों के टहलने के लिए पक्का रास्ता बनाया गया है। बैठने के लिए बेंच और लाइट की व्यवस्था की गई है। साथ ही पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए वृक्षारोपण भी किया गया है।
ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार
योगी सरकार ने इस योजना को न केवल पर्यावरण से जोड़ा, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी लाभकारी बनाया है। अमृत सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और उनके सुंदरीकरण के काम को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनके गांव में ही रोजगार मिल रहा है।