नगर भ्रमण, देव स्नपन और पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ श्री नर्मदेश्वर पुनः प्रतिष्ठा महोत्सव

पूर्वी सिंहभूम, 05 जुलाई ।

टेल्को स्थित प्रेम नगर डनलोप में आयोजित श्री नर्मदेश्वर पुनः प्रतिष्ठा महोत्सव का तीसरा दिन रविवार को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और शिवभक्ति के उल्लास के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।

महोत्सव के दौरान भगवान श्री नर्मदेश्वर की भव्य नगर भ्रमण यात्रा निकाली गई। सुसज्जित पालकी में विराजमान भगवान शिव की शोभायात्रा क्षेत्र के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी, जहां श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया। यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भाग लिया। भजन-कीर्तन और शिव नाम के संकीर्तन के बीच निकली इस यात्रा ने पूरे क्षेत्र में धार्मिक चेतना का संचार किया।

नगर भ्रमण के उपरांत मंदिर परिसर में देव स्नपन का आयोजन हुआ। भगवान श्री नर्मदेश्वर का गंगाजल, पंचामृत एवं अन्य पवित्र द्रव्यों से विधिवत अभिषेक किया गया। इसके बाद पुनः प्रतिष्ठा की वैदिक प्रक्रिया पूरी कर भगवान का विशेष श्रृंगार एवं पूजन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने दिव्य स्वरूप के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

इसके पश्चात वैदिक यज्ञ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। यज्ञ में अंतिम आहुति अर्पित कर विश्व शांति, मानव कल्याण, राष्ट्र की उन्नति और समस्त प्राणियों के मंगल की प्रार्थना की गई। पूर्णाहुति के बाद आयोजित महाभंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

पूरे महोत्सव का विद्वत संचालन कर रहे आचार्य श्री राजकुमार मिश्रा ने कहा कि नगर भ्रमण केवल एक धार्मिक शोभायात्रा नहीं, बल्कि समाज में धर्म, संस्कार और एकता का संदेश पहुंचाने का माध्यम है।

उन्होंने बताया कि जब भगवान नगर का भ्रमण करते हैं तो ऐसी मान्यता है कि उनकी कृपा पूरे क्षेत्र पर बनी रहती है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

आचार्य मिश्रा ने कहा कि देव स्नपन का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार भगवान का अभिषेक पंचामृत, गंगाजल और पवित्र द्रव्यों से करने से केवल विग्रह का ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के मन और भावों का भी शुद्धिकरण होता है। यह अनुष्ठान आत्मिक शांति, पवित्रता और ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है।

उन्होंने आगे कहा कि यज्ञ की पूर्णाहुति किसी भी वैदिक अनुष्ठान की पूर्णता का प्रतीक होती है। अंतिम आहुति के साथ सभी देवी-देवताओं का आह्वान कर लोकमंगल, सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और विश्व कल्याण की कामना की जाती है। पूर्णाहुति यह संदेश देती है कि प्रत्येक शुभ कार्य समाज और मानवता के कल्याण के लिए समर्पित होना चाहिए।

महोत्सव में आचार्य श्री राजकुमार मिश्रा के साथ आस्तिक मिश्रा, चंद्रकांत पांडे, शेषनाग पांडे, सुनील पांडे, निर्दोष मिश्रा, अनुपम मिश्रा, आक्रास जी सहित ब्राह्मणों की टोली ने शास्त्रोक्त विधि-विधान के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठानों का संपादन किया।

आयोजन को सफल बनाने में धनंजय पांडेय, संजय कुमार (लाल), टोनी सिंह, दिलीप जायसवाल, विजय कुमार सिंह, अजय सिंह, समरेश सिंह, गिडू संजय, जितेंद्र पांडेय सहित आयोजन समिति के सभी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं के सहयोग और सहभागिता के लिए सभी का आभार व्यक्त किया।