हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में बुजुर्ग को किया बरी, ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा

प्रयागराज, 22 जुलाई । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर के एक पॉक्सो मामले में आरोपी स्वामी दीन (लगभग 80 वर्ष) को बरी कर दिया है। अपर जिला न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट, हमीरपुर ने 10 दिसंबर 2025 को उन्हें पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 साल की सश्रम कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।

थाना सुमेरपुर में 10 दिसंबर 2021 को दर्ज एफआईआर के अनुसार, 5 दिसंबर 2021 को आरोपी ने चार वर्षीय बच्ची को टॉफी का लालच देकर घर के अंदर ले जाकर अश्लील हरकत की थी। शुरुआत में मामला आईपीसी की धारा 354 और पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत दर्ज हुआ, बाद में जांच के दौरान बच्ची की उम्र के आधार पर धाराएं बदलकर आईपीसी की धारा 376-एबी और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 जोड़ी गईं।

जस्टिस संतोष राय ने फैसला सुनाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज कराने में पांच दिन की देरी का स्पष्टीकरण असंतोषजनक और परस्पर विरोधाभासी पाया गया। मूल एफआईआर में यौनाचार का कोई आरोप नहीं था, गंभीर धाराएं बाद में जोड़ी गईं। मां के बयान में कई महत्वपूर्ण विरोधाभास मिले, जिससे बच्ची को सिखाए-पढ़ाए जाने की आशंका बनी। धारा 164 सीआरपीसी के बयान में पहचान और घटना के समय को लेकर गंभीर विसंगतियां थीं।चिकित्सा और फोरेंसिक साक्ष्य से अभियोजन पक्ष की पुष्टि नहीं हुई।बचाव पक्ष ने चित्रकूट में आरोपी के आंखों के इलाज से जुड़े अन्यत्र दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, जिसे अदालत ने विश्वसनीय और अखंडित पाया। कहा कि पॉक्सो जैसे गंभीर मामलों में पीड़िता की गवाही “सर्वोत्तम गुणवत्ता” की होनी चाहिए, और संदेह का लाभ आरोपी को मिलना चाहिए जब साक्ष्यों में गंभीर विरोधाभास हों।

हाईकोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के दोषसिद्धि आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी को तुरंत रिहा करने का निर्देश दिया।