डीयू में “विकसित भारत @ 2047 और नागरिकों की भूमिका” विषय पर पूर्व राष्ट्रपति ने किया संबोधित

नई दिल्ली, 27 अगस्त । दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और ‘ओम प्रकाश कोहली स्मृति समिति’ की ओर से ‘ओम प्रकाश कोहली मेमोरियल लेक्चर’ के तहत “विकसित भारत @ 2047 और नागरिकों की भूमिका” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। वाइस रीगल लॉज स्थित कन्वेंशन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुख्य अतिथि रहे, जबकि अध्यक्षता डीयू के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने की।

अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि “जीवन में साधारण बनना सबसे बड़ा काम है।” उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी साधारण बना रहता है तो यह उसके लिए श्रेष्ठ उपलब्धि है। ओम प्रकाश कोहली को याद करते हुए उन्होंने कहा कि कोहली किसी भी पद पर रहे, लेकिन उनके भीतर एक विनम्र शिक्षक हमेशा जीवित रहा।

रामनाथ कोविंद ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में आर्थिक, सामाजिक, रक्षा और अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब देश के सामने विकास को टिकाऊ और समावेशी बनाने की चुनौती है।

पूर्व राष्ट्रपति ने ओम प्रकाश कोहली को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह केवल विचारक नहीं, बल्कि अपने आप में एक संस्था थे। कठिन परिस्थितियों और आपातकाल के दौर में भी वे अपने दायित्वों और सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल ज्ञान देना नहीं है, बल्कि ज्ञान को मूल्यों और कौशल से जोड़कर विद्यार्थियों को बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की दिशा दिखाने और उनमें जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाले केंद्र हैं।

डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि “2047 तक भारत विकसित होकर रहेगा, सबको उसमें अपनी भूमिका तलाशनी है।” उन्होंने डीयू के शिक्षकों और विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि उन्हें विकसित भारत के निर्माण में कैप्टन की भूमिका निभानी चाहिए।

प्रो. योगेश सिंह ने ओम प्रकाश कोहली की मानवीय संवेदनशीलता को याद करते हुए कहा कि जीवन से संवेदना समाप्त हो जाए तो जीवन का अर्थ भी समाप्त हो जाता है। उन्होंने हिटलर और अब्राहम लिंकन का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभावी नेतृत्व के लिए करुणा और संवेदनशीलता आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश की जीडीपी को 25 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने के साथ ऐसा समाज भी बनाना होगा, जहां कोई भूखा न रहे और कोई शिक्षा से वंचित न हो। उन्होंने नागरिकों के लिए अनुशासन, राष्ट्रीय चरित्र और सदाचार को आवश्यक बताया।

इस अवसर पर स्वाति कोविंद, साउथ कैंपस की निदेशक प्रो. रजनी अब्बी, डीन ऑफ कॉलेजेज प्रो. बलराम पाणि, सीओएल की निदेशक प्रो. पायल मागो, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और शिक्षाविद उपस्थित रहे।