नई दिल्ली, 21 सितंबर । मोटर व्हीकल रुल्स के रुल 167 में संशोधन के खिलाफ दिल्ली की निचली अदालतों में सोमवार को वकीलों ने न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। इस वजह से अधिकांश मामलों में पक्षकारों को केवल तारीख ही मिली। कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली ने 24 सितंबर को उप-राज्यपाल के घेराव का ऐलान किया है।
हड़ताल का आह्वान कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ ऑल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट बार एसोसिएशंस ऑफ दिल्ली ने किया था। सभी बार एसोसिएशंस के नेता सुबह से ही सभी वकीलों को कोर्ट में न जाने की अपील कर रहे थे। सोमवार को वकीलों की हड़ताल के बाद मोटर व्हीकल रुल्स में संशोधन को वापस लेने पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक उत्तर नहीं आया। इसके बाद 24 सितंबर को उप-राज्यपाल के घेराव का फैसला लिया गया।
कोआर्डिनेशन कमेटी के महासचिव नरवीर डबास ने कड़कड़डूमा कोर्ट में मोर्चा संभाला था। न्यायिक बहिष्कार का आह्वान मोटर व्हीकल रुल्स के रुल 167 में संशोधन के खिलाफ किया गया था।
दरअसल, दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक चालानों की सुनवाई के लिए एसडीएम, एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट और विभागीय अधिकारियों की नियुक्ति की है, जबकि इसके पहले ट्रैफिक चालान का निष्पादन मजिस्ट्रेट की कोर्ट में होता था। नये संशोधन के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ चालान जारी किया गया है तो या तो उसे चालान भरना होगा या चालान जारी होने के 45 दिनों के अंदर दिल्ली सरकार की ओर से नियत अफसरों के समक्ष इसका विरोध करना होगा।
इस संशोधन के तहत अगर किसी व्यक्ति ने 45 दिन के अंदर चालान का विरोध नहीं किया, तो ये माना जाएगा कि उसने चालान स्वीकार कर लिया है। अगर दिल्ली सरकार के बताए हुए अधिकारी ने चालान के विरोध में दलील को खारिज कर दिया, तो संबंधित व्यक्ति कोर्ट में तभी जा सकता है जब वो चालान की राशि का आधा हिस्सा दिल्ली सरकार के पास जमा करे। दिल्ली सरकार के इस फैसले का कोआर्डिनेशन कमेटी ने विरोध जताते हुए संबंधित मंत्री के समक्ष 27 अगस्त को अपनी बातें रखी थी। उसके बाद दिल्ली सरकार के कानून मंत्री के समक्ष भी 7 सितंबर को कोआर्डिनेशन कमेटी ने अपनी बातें रखी थी।
दिल्ली के कानून मंत्री के साथ हुई दो बैठकों में कोआर्डिनेशन कमेटी को ये आश्वस्त किया गया कि दिल्ली सरकार ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए एसडीएम या दूसरे अधिकारियों की नियुक्ति के प्रस्ताव पर कोई अमल नहीं करेगी। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में ये बातें आयी कि दिल्ली सरकार ने ट्रैफिक चालानों के निपटारे के लिए अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसी के बाद वकीलों ने आज न्यायिक बहिष्कार किया।