शिमला, 13 अक्टूबर । हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कॉलेज सिहुंता के निर्माण के लिए दान की गई जमीन वापस लेने के मामले में जफू और एक अन्य याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी है। अदालत ने उन्हें जमीन की वापसी के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास जाने की छूट भी दी है। न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने इस मामले में आदेश पारित किया।
अदालत ने पाया कि सरकारी कॉलेज सिहुंता का निर्माण याचिकाकर्ता की ओर से दान की गई जमीन के बजाय दूसरी जमीन पर किया गया है। इस स्थिति में याचिकाकर्ता ने अदालत से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी थी। साथ ही उन्होंने दान की गई जमीन वापस लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अनुरोध करने की छूट देने की मांग की थी।
अदालत ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए निर्देश दिया कि जमीन वापस लेने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से कोई प्रतिवेदन दिया जाता है, तो सक्षम प्राधिकारी उस पर कानून के अनुसार विचार कर निर्णय ले।
हाईकोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को इस मामले पर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि प्रतिवेदन प्राप्त होने की तारीख से तीन महीने के भीतर उस पर निर्णय लेने का प्रयास किया जाए।
अदालत ने जमीन लौटाने का सीधा आदेश नहीं दिया है, बल्कि याचिकाकर्ताओं को जमीन की वापसी के लिए सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन करने की अनुमति दी है। जमीन वापस करने के अनुरोध पर निर्णय संबंधित प्राधिकारी को कानून के अनुसार लेना होगा।
