रांची, 02 नवंबर । झारखंड उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार पर आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाया। न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगे जाने पर यह जुर्माना लगाया। अदालत ने जुर्माने की राशि झारखंड विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) में जमा करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतिवादी संख्या दो यानी मुख्यमंत्री को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया था। उस दौरान भी समय मांगे जाने पर अदालत ने 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। ईडी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।
दरअसल, यह मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा है। मुख्यमंत्री ने ईडी के तत्कालीन अधिकारियों कपिल राज, देवव्रत झा और अन्य पर पूछताछ एवं कार्रवाई के दौरान कथित रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने केंद्रीय जांच एजेंसी पर मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाकर उनकी छवि खराब करने का आरोप भी लगाया था।
मुख्यमंत्री की शिकायत के आधार पर दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देते हुए ईडी अधिकारियों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। याचिका में प्राथमिकी के साथ-साथ इसके आधार पर चल रही जांच और पूरी कानूनी कार्रवाई को निरस्त करने की मांग की गई है। मामले में अब नौ दिसंबर को अगली सुनवाई होगी।
