नहीं रहे जनसंघ के संस्थापक सदस्य वनमाली राम, विभिन्न संगठनों ने शोक व्यक्त किया
कोडरमा, 14 अक्टूबर (हि.स.)। जनसंघ के संस्थापक सदस्य बनमाली राम के निधन से सामाजिक संगठन, राजनीतिक और धार्मिक जगत में गहरा शोक व्याप्त है। 94 वर्षीय वनमाली राम ने सोमवार को विद्यापुरी स्थित अपने निवास स्थान में अंतिम सांस ली। उनकी समाजसेवा और विचारशीलता के कारण उन्हें माहुरी समाज ने “समाज चिंतक” की उपाधि से नवाजा था। वर्ष 2022 में माहुरी वैश्य महामंडल गिरीडीह द्वारा आयोजित 109वें वार्षिक अधिवेशन में उन्हें यह सम्मान दिया गया था। बनमाली राम का जीवन समाज सुधार और संगठन के कार्यों में समर्पित रहा। माहुरी समाज के उत्थान के लिए उन्होंने जीवनभर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
उन्होंने “मनीराम भदानी शिक्षा न्यास” की स्थापना कर समाज के बच्चों की उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का काम किया। उनकी सक्रियता केवल समाज सुधार तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने धार्मिक प्रचार-प्रसार में भी अहम भूमिका निभाई। 1970 और 1974 में उन्होंने “सिद्धीदात्री माँ मथुरासिनी पूजन” का आयोजन कर माहुरी समाज में धार्मिक परंपराओं को मजबूत किया। उनके संकलन में तैयार की गई “दैनिक वंदना” को समाज में व्यापक रूप से स्वीकार किया गया और नियमित पूजा पद्धतियों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनी।
राजनीतिक क्षेत्र में भी उन्होंने झुमरी तिलैया नगर और कोडरमा जिले में भारतीय जनता पार्टी के विकास के लिए अनेक प्रयास किए। वह हजारीबाग जिला समिति में उपाध्यक्ष और कोडरमा जिला में पार्टी के प्रथम अध्यक्ष रहे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में भी उन्होंने नगर कार्यवाह के रूप में सेवाएं दीं और संघ की गतिविधियों में सक्रिय भाग लिया। बनमाली राम के अंतिम संस्कार में समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति शामिल हुए। उनके पुत्र आशुतोष भदानी विहिप एवं कई धार्मिक संगठन से जुड़े है। इधर केंद्रीय मंत्री सह कोडरमा सांसद अन्नपूर्णा देवी, विधायक डॉ. नीरा यादव, पूर्व ज़िप अध्यक्ष शालिनी गुप्ता, माहुरी महामंडल के उपाध्यक्ष रवि कपसीमे, अरुण सेठ, डॉ सागरमणि सेठ, सुनील भदानी, मुन्ना भदानी, अधिवक्ता सुरेंद्र आर्या, प्रदीप सुमन, रीमा देवी, संतोष सेठ, जयंती सेठ, सुषमा सुमन, मनोज पहाड़ी, राजेश कप्सिमे, अविनाश सेठ, मनीष कप्सिमे सहित अन्य ने उनके निवास जाकर शोक संवेदन प्रकट किया।
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