कैथल में शादी कार्ड पर डल्लेवाल की तस्वीर: अनशन का 74वां दिन, किसान पहुंचे!

पंजाब-हरियाणा के खनौरी सीमा पर किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल का अनशन अब 74वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच, हरियाणा के किसान अपने खेतों से पानी के साथ गंगाजल लेकर मोर्चे पर पहुंच रहे हैं। उनका मानना है कि गंगाजल का सेवन करने से डल्लेवाल के शरीर को मजबूती मिलेगी। इस मोर्चे पर किसानों का उत्साह बढ़ा हुआ है और वे अपनी शक्ति के प्रतीक के रूप में यह जल लेकर आ रहे हैं।

इसके अलावा, कैथल का निवासी विक्रम 16 फरवरी को अपनी शादी के लिए बेहद खास तैयारी कर रहा है। उसने अपने शादी के कार्ड पर जगजीत सिंह डल्लेवाल की तस्वीर छपवाई है। मोर्चे पर पहुंचकर उसने डल्लेवाल को अपना कार्ड दिया और उन्हें शादी में आमंत्रित किया। विक्रम किसान आंदोलन से गहरे जुड़े हुए हैं और पिछले कई दिनों से लगातार मोर्चे पर उपस्थित हैं। किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने बताया कि विक्रम के गांव के किसानों के ट्रैक्टर पिछले साल पुलिस की कार्रवाई में तोड़ दिए गए थे, लेकिन विक्रम ने कभी हार नहीं मानी।

इस बीच, डल्लेवाल का पोता भी मोर्चे पर अपने दादा से मिलने आया है। तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जिसमें वह डल्लेवाल की गोद में सोता नजर आ रहा है। यह दृश्य किसानों की एकजुटता और गहरी पारिवारिक रागों को दर्शाता है। साथ ही, किसानों ने हर किसी से अपील की है कि वे 11 फरवरी से शुरू हो रही महापंचायतों में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें ताकि उनके संघर्ष को मजबूती मिले।

किसानों की केंद्र सरकार के साथ होने वाली बैठक 14 फरवरी को निर्धारित है। इस बैठक में चंडीगढ़ में किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें किसान अपनी रणनीति बनाएंगे कि मुद्दों को कैसे उठाया जाए। हालांकि, पहले ही किसानों ने केंद्र सरकार को अपनी मांगों का एक पत्र भेज दिया है। यह बैठक किसानों की अगली कार्रवाई की दिशा तय करेगी और उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने का एक बेहतर अवसर प्रदान करेगी।

किसान आंदोलन ने इस क्षेत्र में एक नई चेतना जागृत की है और किसानों के समर्थन में चल रहे कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि उन्होंने अपनी आवाज उठाने और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की चुनौती स्वीकार करने का संकल्प लिया है। ऐसे में मोदी सरकार को यह समझना होगा कि किसान किसी भी प्रकार के समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन उनकी मांगें पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।