गड़बड़ा धाम में गैस सिलेंडर फटने से मचा हड़कंप, दुकानें जलकर राख
फायर ब्रिगेड तीन घंटे देर से पहुंची
मीरजापुर, 19 मई (हि.स.)। हलिया थाना क्षेत्र के गड़बड़ा धाम स्थित शीतला माता मंदिर परिसर में सोमवार को बड़ा हादसा होते-होते टल गया। दर्शन-पूजन के लिए जुटे श्रद्धालुओं द्वारा प्रसाद बनाते समय गैस सिलेंडर फट गया, जिससे आग भड़क उठी। मेला परिसर में अफरा-तफरी मच गई। दर्जनों दुकानें जलकर राख हो गईं और लाखों का नुकसान हो गया। आग इतनी भीषण थी कि मंदिर के पास खड़ी बाइकों और साइकिलों तक को चपेट में ले लिया।
तीन घंटे देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड के आने तक पुलिस, ग्रामीण और स्थानीय दुकानदारों ने मिलकर जनरेटर से मोटर चलाकर आग पर किसी तरह काबू पाया।
क्या हुआ था घटनास्थल पर?
सोमवार को गड़बड़ा धाम में लगे साप्ताहिक मेले में हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। दर्शन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं द्वारा प्रसाद (लपसी-पूड़ी) बनाया जा रहा था। इसी दौरान सुपरवाइजर माली के छप्पर के नीचे गैस सिलेंडर फट गया। तेज धमाके के साथ आग फैल गई और देखते ही देखते मेला परिसर का एक हिस्सा जलने लगा।
दुकानों में लाखों का नुकसान
सुपरवाइजर माली, राम नारायण, दिलीप माली, कल्लू, इंद्रावती देवी, आरती देवी, कुसुम देवी, लल्लू माली व आशुतोष जायसवाल की दुकानों का लाखों का सामान जलकर राख हो गया।
श्रद्धालुओं की गाड़ियां भी चपेट में
रीवा (मप्र) के चंद्रमा प्रसाद की बाइक,प्रयागराज के तीखोर मांडा निवासी भोला नाथ और कल्लू, खीरी बहरैचा निवासी देशराज और नन्हकू की बाइकों,बंजारी कला के कथा वाचक तुलसी प्रसाद दुबे और मड़वा धनावल निवासी श्याम नारायण दुबे की साइकिलें भी जलकर राख हो गईं।
ग्रामीणों और पुलिस की तत्परता से बची बड़ी दुर्घटना
बिजली का तार जलने से समरसेबल बंद हो गए, लेकिन थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने मंदिर में लगे जनरेटर को स्टार्ट कराकर मोटर से पानी चलवाया। ग्रामीणों ने बाल्टी, घड़ा, पंपसेट के जरिए आग बुझाने में मदद की। तीन घंटे बाद फायर ब्रिगेड पहुंची, लेकिन तब तक आग पर काबू पाया जा चुका था।
अधिकारी मौके पर पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही सीओ लालगंज अशोक कुमार सिंह, नायब तहसीलदार राजू यादव, हलिया और ड्रमंडगंज के थाना प्रभारी, उपनिरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जांच-पड़ताल में जुटे।
प्रशासन की लापरवाही से उठे सवाल
गड़बड़ा धाम में हर सोमवार हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और करीब 50 दुकानें मेला परिसर में लगती हैं। इसके बावजूद अग्निशमन की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ग्रामीण और पुलिस समय पर सक्रिय नहीं होते, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं।