जयपुर, 19 मई । एमएसीटी मामलों की विशेष अदालत कम 1, महानगर द्वितीय ने वाहन दुर्घटना में मौत का दावा कर 85 लाख रुपए का मुआवजा मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं अदालत ने आदेश की कॉपी एडीजी, सतर्कता को भेजते हुए एएसआई नंद लाल, वाहन स्वामी कैलाश चन्द और चालक पप्पू कुमार माली के खिलाफ कार्रवाई पर दो माह में अदालत में रिपोर्ट पेश करने को कहा है। अदालत ने यह आदेश लोतिका देवी व अन्य की ओर से दायर क्लेम याचिका को खारिज करते हुए दिए।
पीठासीन अधिकारी शिवकुमार ने अपने आदेश में कहा कि प्रागपुरा थाने के तत्कालीन एएसआई नंद लाल जांगिड़ ने याचिकाकर्ताओं को क्लेम दिलाने के लिए कार को घटना में लिप्त दिखाया और गैर जिम्मेदाराना तरीके से अनुसंधान किया है। अदालत ने कहा कि एडीजी, सतर्कता एएसआई के खिलाफ कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में कोई जांच अधिकारी गलत रूप से चालान पेश करने का दुस्साहस ना कर सके। क्लेम याचिका में कहा गया कि 18 नवंबर 2018 को याचिकाकर्ता का पति गौतम कुमार अपने बेटे के साथ अपने पुत्र की सगाई की व्यवस्था देखने विराटनगर से पावटा जा रहे था। राजपुरा के पास वह मोटर साइकिल रोककर दूसरी बाइक पर आ रहे अपने भतीजे का इंतजार करने लगा। इतने में शाहपुरा की ओर से आ रही वैगन-आर कार ने उसे टक्कर मार दी। जिससे वह घायल हो गया और बाद में एसएमएस में उसकी मौत हो गई। इसलिए उसके आश्रितों को 85 लाख रुपए का क्लेम दिलाया जाए। जिसका विरोध करते हुए निजी बीमा कंपनी के वकील जेके अग्रवाल ने कहा कि जिस वाहन से दुर्घटना होना बताया गया है, उसके खिलाफ दुर्घटना के कई अन्य मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। वाहन का इतने कम समय में इतनी दुर्घटनाओं में लिप्त होना शंका उत्पन्न करता है कि वाहन को मिथ्या बार-बार दुर्घटनाओं में लिप्त दिखाकर क्लेम दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। दोनों पक्षों की बहस सुनकर अदालत ने क्लेम याचिका को खारिज करते हुए जांच अधिकारी एएसआई व वाहन मालिक के साथ चालक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं।