जयपुर, 06 जून । श्रम न्यायालय ने 34 साल पहले गलत तरीके से हटाए गए कर्मचारी को अदालती आदेश के बावजूद बकाया भुगतान नहीं करने पर होटल क्लार्क्स आमेर प्रबंधन को कहा है कि वह प्रार्थी कर्मचारी को मांगी गई राशि की एक चौथाई राशि के तौर पर छह लाख रुपये और 25 हजार रुपये का हर्जाना 8 जून तक अदा करे। अदालत ने कहा कि राशि जमा नहीं होने पर उसी दिन कुर्की वारंट जारी कर पुलिस कमिश्नर को भेजे जाए। इसके साथ ही होटल को सील किए जाने के दौरान होटल प्रबंधन के खर्च पर उचित संख्या में सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए जाए। पीठासीन अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता ने यह आदेश प्रार्थी जगदीश के मामले में दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा की प्रार्थी को साल 1992 से आजीविका से वंचित रखा गया। अदालत के अवार्ड जारी करने के बावजूद न तो उसे ड्यूटी पर वापस लिया और ना ही एक रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 34 साल का पहाड़ जैसा लंबा समय बीत चुका है। इस दौरान उसके परिवार ने कितनी आर्थिक तंगी भोगी, इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। गौरतलब है कि जगदीश को 1 मार्च 1992 को होटल मैनेजमेंट ने नौकरी से हटा दिया था। इसे चुनौती देने पर 19 अक्टूबर 2015 को लेबर कोर्ट ने कर्मचारी को हटाने की कार्रवाई गलत बताते हुए उसे वापस रखने और पिछले बकाया वेतन भत्ते सहित सभी लाभ देने के आदेश दिए थे।