वाराणसी, 28 अगस्त । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि संघ में अपरिचित को परिचित एवं परिचित को मित्र बनाने की परम्परा रही है। स्वतंत्रता, समानता एवं बन्धुता इन तीनों अवधारणाओं को विश्व के अनेक देशों ने अलग-अलग रूपों में स्वीकार किया। ऐसे राष्ट्र जहां केवल स्वतंत्रता को महत्व दिया गया वहां स्वच्छंदता व्याप्त हो गयी। जबकि सोवियत रूस जैसे देश ने समानता को वरीयता दी, यह विचार भी टिक नहीं पाया। भारतीय संस्कृति में बन्धुता को स्वतंत्रता और समानता के साथ जोड़ा गया है। इन तीनों तत्वों का मूलाधार सामाजिक समरसता है।
सरकार्यवाह शुक्रवार को यहां संघ के काशी मध्य तिलक नगर में आयोजित रक्षाबन्धन उत्सव को सम्बोधित कर रहे थे। सिगरा स्थित डॉ. सम्पूर्णानन्द स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में बतौर मुख्य वक्ता सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने योग वशिष्ठ के एक श्लोक का उल्लेख कर कहा कि ऐसे लोग जो हमारे बन्धु नहीं हैं, उनसे प्रतिदिन मिलने से निकटता बढ़ती है और वह हमारे बन्धु बन जाते हैं। जबकि निकटता के अभ्यास को छोड़ने से बन्धुता का स्नेह बन्धन छूट जाता है। उपस्थित स्वयंसेवकों एवं मातृशक्ति को सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि हमारी एकता एवं एकात्मता विश्व बन्धुता के संरक्षण और संवर्धन का आधार है। न्यायोचित मार्ग पर चलते हुए बन्धुता को आधार बनाकर स्वतंत्रता और समानता की रक्षा करने के लिए भारत ने सामाजिक समरसता को अंगीकार किया है।
उन्होंने कहा कि हिन्दू संस्कृति में सम्पूर्ण विश्व को एक कुटुम्ब स्वीकार किया गया है। मैं और समस्त जीव एक ही परमात्मा के अंश हैं, उदार चरित के साथ इस भावना को स्वीकार करना चाहिए। सम्बन्धों के मध्य अविश्वास, रक्षाबन्धन के स्नेहसूत्र को कमजोर करते हैं। आपस में बंटने पर विरोधी पक्ष को उसका लाभ मिलता है। जब हम सभी विश्व बंधुत्व की चर्चा करते है तो उसका मूलाधार भविष्य पुराण का श्लोक ”येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” जिसका अर्थ है कि जिस प्रकार राजा बलि को स्नेह बन्धन में बांधा गया उसी प्रकार मैं भी आपको स्नेह बन्धन में बांधता हूं। यह बन्धन स्थिर रहे। वर्तमान में परिवार और समाज में जो अस्थिरता उत्पन्न हो गयी है, उसका कारण स्वार्थ है। मनुष्य के अन्दर स्वार्थ विकार के रूप में नहीं आना चाहिए।
सरकार्यवाह ने नेपाल त्रासदी में जान गंवाने वाले नागरिकों को संघ परिवार की ओर से श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जो इस आपदा में संकटग्रस्त हुए हैं, संघ परिवार उनके प्रति भी अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता है।
इसके पहले काशी मध्य के संघचालक डॉ हेमन्त गुप्त, तिलक नगर के नगर संघचालक प्रदीप, सरकार्यवाह ने भगवा ध्वज को रक्षासूत्र बांधा। कार्यक्रम का संचालन नगर कार्यवाह सत्यपाल ने किया। उत्सव में प्रमुख रूप से क्षेत्र कार्यवाह डॉ वीरेन्द्र जायसवाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल, क्षेत्र सेवा प्रमुख युद्धवीर, प्रान्त कार्यवाह मुरली पाल, सह प्रान्त कार्यवाह डॉ राकेश, प्रान्त प्रचारक रमेश, प्रदेश के आयुष मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ दयाशंकर मिश्र दयालू, महापौर अशोक तिवारी आदि की भी मौजूदगी रही।