लखनऊ, 26 अगस्त । उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना के माध्यम से महिलाओं की उद्यमिता और सहभागिता को और अधिक बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित करने के साथ ही उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाए। इसके लिए प्रदेश में स्थापित कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटरों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश शासन बी.एल. मीणा ने बुधवार काे बताया कि उप मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में प्रदेश में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन (पीएम एफएमई) योजना के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया गया है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा पीएम एफएमई योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश को अब तक कुल 31,335 यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य दिया गया है। इसके सापेक्ष लगभग 27 हजार यूनिटों के लिए ऋण स्वीकृत हो चुका है। इन यूनिटों की औसत लागत लगभग 4 लाख रुपये है। उन्होंने बताया कि पीएम एफएमई योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में प्रदेश में लगभग 16 हजार यूनिट स्थापित की गई हैं। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।
मीणा ने बताया कि स्टार्टअप आधारित नवीन तकनीक के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने तथा प्रदेश की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 14 स्थानों-मेरठ, सहारनपुर, आगरा, बरेली, झांसी, लखनऊ, कौशांबी, गोरखपुर, अयोध्या, बस्ती, वाराणसी, मिर्जापुर, अलीगढ़ तथा कानपुर देहात में कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों में दुग्ध, बेकरी, पेठा, नमकीन, मस्टर्ड ऑयल, मैंगो, हल्दी, आरटीई, तुलसी एवं अमरूद प्रसंस्करण सहित विभिन्न उत्पादों पर आधारित 46 प्रोसेसिंग लाइनों की स्थापना की गई है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश को 9,000 नई यूनिट स्थापित करने का लक्ष्य दिया गया है। लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति के लिए जनपदीय रिसोर्स पर्सन, जिला उद्यान अधिकारियों, प्रधानाचार्य/खाद्य प्रसंस्करण अधिकारियों तथा बैंकों के प्रतिनिधियों को अधिक से अधिक आवेदन कराने और ऋण स्वीकृति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि हाल में बैंकों की समीक्षा के दौरान पाया गया कि विभिन्न बैंकों के स्तर पर 7 हजार से अधिक आवेदन ऋण स्वीकृति के लिए लंबित हैं। इनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एचडीएफसी बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक तथा इंडियन बैंक में लंबित आवेदन शामिल हैं। संबंधित बैंक प्रतिनिधियों को लंबित आवेदनों की सूची उपलब्ध कराते हुए इनके शीघ्र निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
डीएलसी स्तर पर लंबित आवेदनों पर भी तत्काल कार्रवाई के लिए समस्त जिला उद्यान अधिकारियों, खाद्य प्रसंस्करण अधिकारियों, प्रधानाचार्यों एवं फल संरक्षण अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। साथ ही जनपदीय रिसोर्स पर्सन को निर्देश दिए गए हैं कि नए आवेदनों का पीएम एफएमई योजना के साथ-साथ एग्रीकल्चर इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) में कन्वर्जेन्स सुनिश्चित कराया जाए।
बी.एल. मीणा ने बताया कि समस्त डीआरपी/डीआरओ एवं उप निदेशक, खाद्य प्रसंस्करण को अधिक से अधिक यूनिटों का फॉर्मलाइजेशन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अग्रणी 20 जनपदों के डीआरपी, जिला उद्यान अधिकारी, संबंधित बैंक प्रतिनिधि तथा जनपद के मुख्य विकास अधिकारी को सम्मानित करने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि जनपदीय रिसोर्स पर्सन के मानदेय का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित कराने के लिए फल उद्योग विकास अधिकारियों एवं उप निदेशक (खाद्य प्रसंस्करण) को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं।