शिमला, 02 सितंबर । हिमाचल प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए सरकार चरणबद्ध तरीके से एक हज़ार इलेक्ट्रिक और 200 हाइड्रोजन बसें खरीदने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि प्रदेश में तीन हज़ार बसें खरीदने पर करीब सात हजार करोड़ रुपये खर्च करना उचित नहीं होगा। सरकार जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध तरीके से बसों का बेड़ा बढ़ाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई इलेक्ट्रिक बसों की खरीद में केवल बस की कीमत ही नहीं, उसके रखरखाव और मरम्मत का खर्च भी शामिल किया जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों की 12 वर्ष तक देखभाल और मरम्मत की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी की होगी। उन्होंने बताया कि पहले इलेक्ट्रिक बस की लागत करीब 70 रुपये प्रति किलोमीटर तक पड़ रही थी, जो अब सभी खर्चों को जोड़ने के बाद करीब 36 रुपये प्रति किलोमीटर रह गई है।
मुख्यमंत्री ने यह बात बुधवार को विधानसभा में सरकाघाट और धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों में हिमाचल पथ परिवहन निगम यानी एचआरटीसी की बसों की कमी और बंद पड़े बस रूटों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कही। विधायक चंद्रशेखर ने यह मामला विधानसभा में नियम-62 के तहत उठाया था।
विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि एचआरटीसी प्रदेश के लोगों के लिए जीवनरेखा की तरह है, लेकिन सरकाघाट और धर्मपुर क्षेत्रों में बसों की कमी के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था का मौके पर आकलन कराने के लिए निगम के उच्च अधिकारियों की टीम भेजने की मांग की।
सरकाघाट-धर्मपुर में 16 रूट बंद होने का दावा
चंद्रशेखर ने कहा कि सरकाघाट और धर्मपुर क्षेत्र में 16 बस रूट पूरी तरह बंद हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में सरकाघाट डिपो को दो हिस्सों में बांटकर धर्मपुर डिपो बनाया गया था। उस समय सरकाघाट डिपो में करीब 280 बसें थीं, जबकि धर्मपुर डिपो को 48 बसें दी गई थीं। उनका आरोप था कि धर्मपुर डिपो को कुछ पुरानी और लगभग अपनी उपयोगी अवधि पूरी कर चुकी बसें भी दी गईं।
विधायक ने कहा कि वर्ष 2025 की आपदा के बाद क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था और प्रभावित हुई। कई बसें काफी पुरानी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि तीन बसें 15 लाख किलोमीटर से अधिक चल चुकी हैं। उनका कहना था कि इस स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए उद्योग मंत्री ने कहा कि एचआरटीसी व्यावसायिक संस्था नहीं है, यह जनसेवा से जुड़ा निगम है। उन्होंने सरकाघाट और धर्मपुर में बसों तथा रूटों की स्थिति की जानकारी विधानसभा में दी।
सरकार के अनुसार सरकाघाट क्षेत्र के लिए 77 बसों का बेड़ा स्वीकृत है, जिसमें से 58 बसें उपलब्ध हैं। इनमें नौ बसें नौ वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं। इसके अलावा 10 जेएनएनयूआरएम बसें भी चल रही हैं। उपलब्ध बसों से 74 रूटों पर सेवाएं दी जा रही हैं, जबकि 17 रूट बंद हैं।
धर्मपुर में 56 स्वीकृत रूटों में से 46 पर बस सेवा चल रही है। यहां 47 बसों के माध्यम से 57 रूट संचालित किए जा रहे हैं, जबकि नौ रूट बंद हैं। सरकार ने यह भी माना कि एचआरटीसी में स्पेयर पार्ट्स और कर्मचारियों की कमी है।
सरकार की ओर से कहा गया कि उच्च स्तर के अधिकारी जल्द संबंधित क्षेत्र का दौरा कर वहां की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
मंत्री ने बताया कि एचआरटीसी के लिए 250 डीजल बसों और 100 छोटी बसों की खरीद की प्रक्रिया चल रही है। धर्मपुर में चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध नहीं होने के कारण वहां नई इलेक्ट्रिक बसें नहीं चलाई जा सकी हैं। चार्जिंग की सुविधा विकसित करने के लिए बिजली विभाग को 63 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए हैं।
जयराम ठाकुर ने इलेक्ट्रिक बस नीति पर उठाए सवाल
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की इलेक्ट्रिक बस नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में भी इलेक्ट्रिक बसें भेजी गई थीं, लेकिन वे रास्ते में खड़ी हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कई मार्गों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चुनौतीपूर्ण है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों की तुलना में करीब तीन गुना महंगी पड़ती हैं। ऐसे में सरकार को यह देखना होगा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की मूल जिम्मेदारी भी पूरी हो।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए और बसों की वास्तविक उपलब्धता तथा उनके संचालन की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।