मास्टर प्लान से योजनाबद्ध विकास, लेकिन प्रभावितों को भी मिले सुनवाई का अवसर-हाईकोर्ट
जयपुर, 26 मई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि मास्टर प्लान शहर के विकास को योजनाबद्ध विकास करने वाला दस्तावेज है। जिसे प्राधिकरण की मर्जी या किसी व्यक्ति के हित में संशोधित नहीं किया जा सकता। इसे व्यापक जनहित में लागू किया जाता है। अदालत ने कहा कि मास्टर प्लान से शहर के विकास और सौंदर्यीकरण को बिना किसी बाधा आगे बढाना चाहिए, लेकिन इस दौरान प्रभावितों को भी सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने कोटपूतली में रोड चौड़ी करने के लिए निर्माण तोड़ने के मामले में राज्य सरकार को कमेटी गठन के आदेश दिए हैं। जस्टिस अनूप कुमार ढंड की एकलपीठ ने यह आदेश इस संबंध में दायर 12 दर्जन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार पन्द्रह दिन में कमेटी गठित करे और यह कमेटी प्रभावितों के स्वामित्व के संबंध में पेश अभ्यावेदन का निस्तारण करें। वहीं यदि किसी याचिकाकर्ता के पास संपत्ति के वैध दस्तावेज हैं, लेकिन सडक़ चौडी करने के लिए उसे लेना जरूरी है तो डीएलसी रेट के आधार पर भुगतान किया जाए और सरकारी योजना के तहत उसे पात्रता के अनुसार भूमि आवंटित की जा सकती है। वहीं यदि रोड निर्माण के दौरान पेड़-पौधों को हटाने की जरूरत है तो उनकी गणना कर आसपास के सार्वजनिक जगह पर दस गुणा पेड़ लगाए जाए।
याचिकाओं में अधिवक्ता आशीष शर्मा व अन्य ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ताओं के पास भूमि का पंजीकृत विक्रय पत्र है। वहीं कुछ याचिकाकर्ताओं के पास खेतडी रियासत की ओर से जारी पट्टा है। याचिकाकर्ता अपनी संपत्तियों पर नियमानुसार काबिज भी हैं। मास्टर प्लान में यहां रोड की चौडाई साठ फीस से कम है। इसके बावजूद भी यहां अस्सी से सौ फीट चौडी रोड निर्माण के लिए याचिकाकर्ताओं के कब्जे हटाए जा रहे हैं। याचिका में कहा गया कि पूर्व में अदालती आदेश की पालना में याचिकाकर्ताओं ने इस संबंध में राज्य सरकार को अपनी आपत्तियां दी थी, लेकिन उसे निस्तारित किए बिना ही निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई आरंभ की गई है। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने राज्य सरकार को कमेटी गठित कर नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
—————