पूर्वी सिंहभूम, 22 सितंबर । बिष्टुपुर पुलिस ने दोपहिया वाहन चोरी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान में अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों की निशानदेही पर बागबेड़ा, पोटका और कोवाली थाना क्षेत्रों में छापेमारी कर चोरी की 21 बाइक और स्कूटी बरामद की हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) डॉ. एहतेशाम वकारिब ने मंगलवार को मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह के सदस्य शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों से दोपहिया वाहन चोरी कर उन्हें दूसरे क्षेत्रों में खपाते थे। पुलिस बरामद वाहनों के इंजन और चेचिस नंबर के आधार पर उनकी जांच कर रही है।
एसएसपी के अनुसार, 21 सितंबर की रात पुलिस को सूचना मिली थी कि पीएम मॉल के पास दो युवक चोरी की स्कूटी लेकर घूम रहे हैं और किसी अन्य वाहन को चोरी करने की तैयारी में हैं। सूचना पर बिष्टुपुर पुलिस ने विशेष टीम गठित कर छापेमारी की और दोनों युवकों को पकड़ लिया। बरामद स्कूटी की जांच में उसके चोरी की होने की पुष्टि हुई। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश शुरू की।
इसके बाद बागबेड़ा, पोटका और कोवाली थाना क्षेत्रों में लगातार छापेमारी की गई। इस दौरान विभिन्न स्थानों से चोरी की 21 दोपहिया गाड़ियां बरामद की गईं।
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बागबेड़ा गांधी नगर निवासी महेश कुमार उर्फ गोलू, पोटका जोजोसाई निवासी मुनीराम मुर्मू और कारू मार्डी, बागबेड़ा लाल बिल्डिंग दुर्गा पंडाल निवासी विक्रांत साहनी और विक्रम साहनी, कोवाली नरदा निवासी अशोक पात्रो, कोवाली कुंदरूकोचा निवासी पेलाराम सरदार तथा कोवाली बोंगादुंगरी निवासी काशीनाथ सरदार के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य बिष्टुपुर थाना क्षेत्र के जुबली पार्क, नेचर पार्क, पीएम मॉल और नॉर्थ पार्किंग एरिया समेत अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों में खड़े दोपहिया वाहनों को निशाना बनाते थे। चोरी के बाद वाहनों की पहचान छिपाने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और नंबर प्लेट में बदलाव किया जाता था। इसके बाद वाहनों को शहर से बाहर ग्रामीण इलाकों तथा पड़ोसी राज्य ओडिशा के सीमावर्ती गांवों में ले जाकर बेचने की बात सामने आई है।
पुलिस बरामद वाहनों के इंजन और चेचिस नंबर तथा रजिस्ट्रेशन विवरण का सत्यापन कर रही है। इन वाहनों को विभिन्न थाना क्षेत्रों में दर्ज वाहन चोरी के मामलों से जोड़कर जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि बरामद वाहनों से कई पुराने मामलों का भी खुलासा हो सकता है।
गिरोह के सदस्यों से पूछताछ के आधार पर चोरी के वाहनों को रखने, खरीद-बिक्री करने और दूसरे इलाकों तक पहुंचाने में शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।————–